माँ कामाख्या शक्तिपीठ चालीसा (Maa Kamakhya Shaktipeeth Chalisa lyrics in hindi) - Bhaktilok

Roshan Lal Bind

 माँ कामाख्या शक्तिपीठ चालीसा (Maa Kamakhya Shaktipeeth Chalisa lyrics in hindi) - 


॥ दोहा 

माँ दुर्गा की साधना, ममता की तस्वीर

क्षणभर में बदले यहाँ, भक्तों की तक़दीर


॥ चौपाई ॥

गौरी गणपति प्रथम मनाऊं ।

सकल कामना सिद्ध कराऊं ॥

जगजननी कामाख्या माता I

शिवशक्ति मेरी भाग्यविधाता ॥


लगन लगी कुछ भी ना जानूं ।

कैसे तेरा गुणगान बखानूं ॥

दस विद्या का अंश मात्र भी ।

जानूं नहीं ग्रह गौचरात्र भी ॥


शुभ और अशुभ घड़ी तू जाने ।

बैठ गया हूं तुझको रिझाने ॥

बालक बुद्धि जान निहारो ।

सिर पे रख दो हाथ तुम्हारो ॥


परमेश्वरी सम्पूर्ण आराध्या

निकसी अंतस अर्चन आध्या ॥

ब्रह्मा विष्णु शिव हे माते ।

काम क्षेत्र तेरा ध्यान लगाते ॥


मुनिवर श्रेष्ठ वशिष्ठ सिद्ध हैं ।

भांतिब्रह्म जन जन प्रसिद्ध है ।

हार के आया त्रिपुर भैरवी ।

कौन करे मां मेरी पैरवी ॥


निपट अकेला निपट अनाड़ी ।

चल जाए मेरी भी गाड़ी ॥

एक बार मोहि आन निहारो ।

कामाख्या मेरी मात उबारो ॥


मनो कामना पूरी कर दो । ।

शरण पड़ा हूं माता वर दो ॥

पूरब दिशि मां तारा दर्शन ।

अगनकण षोडशी सुदर्शन ॥


धूमावती दक्षिण में दयाला ।

नैऋत्यां भज भैरवी माला


भुवनेश्वरी पश्चिम करे रक्षा ।

छिन्नमस्ता वायब्य सुरक्षा 11

बगलामुखी उत्तर दिशि शोभा ।

त्रिपुरसुंदरी दे मति बोधा ॥


ऊर्ध्व उज्वला मातंगिनी मां ।

सर्व रक्षिका क्लीं काली मां ॥


दसों दिशा में तेरी ज्योति ।

रोम रोम आराधना होती 

जय जयकारे नभ गूंजे मां ।

अन धन खुशियां सब लूटे मां ॥ 


आशा पूरण आज करो मां ।

संकट काटो कष्ट हरो मां ॥

स्वीकारो मेरी मानस पूजा ।

नैम धरम जानूं नहीं दूजा ॥


पावन दिन वैशाख तृतीया ।

जाप करै सम्मुख रख दीया ॥

परम् पिता शिवशंकर कहते ।

निश्छल मन हो आंसू बहते ॥


ऐसी करो पुकार सुने मां ।

जो भी वांछित वर दे दे मां ॥

यही धारणा लेकर बैठा पूजा

प्रार्थना करने बैठा डाकिन,

शाकिन पास ना फटकै ।

प्रेतादिक सबभागे बचकै 11

निर्भय हो कर तुम्हें मनाऊं ।

नित्य नए गुणगान सुनाऊं ॥


सभी सिद्धियां देने वाली वाली ।

बिगड़े भाग्य बनाने वाली ॥

अखिलाराध्या भीम लोचना ।

दीनन दुःख दारिद्र मोचना ॥


रक्तबीज महिसासुर मर्दिनि

काम रूप मां नित्य वंदिनि ॥

नव ग्रहादि अरु दिग् दिग्पाला ।

क्षेत्रपाल हो सब रखवाला 11

बावन भैरव चौसठ योगिन ।

चले नहीं मां तब आज्ञा बिन ॥


अप्सरायक्ष यक्षिणी शीश नवावै ।

तेरे लाल को नहीं सतावै ॥

ब्रह्मदैत्य वेताल कान भरै ना कोई मंथरा ॥


सत कोटि ब्रह्मांड हैं तेरे ।

रूप तेरे उनमें बहुतेरे

ममता का आंचल फैलाओ ।

लाल को अपने गले लगाओ ॥


दुर्बल अति कमजोर हूं मैया ।

बन जाऊं तेरो कुंवरकन्हैया ॥

कठिन कौनसो काम तुझे मां ।

जो ना तुम कर सको उसे मां ॥


" लहरी" लज्जा हाथ तेरे मां ।

निश्चित जागे भाग्य मेरे मां ॥


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