माँ कामाख्या शक्तिपीठ चालीसा (Maa Kamakhya Shaktipeeth Chalisa Lyrics in Hindi) -
॥ दोहा ॥
डम डम डम डमरू बजे,
अन धन बरसै ठाठ
मन वांछित माया मिले,
पाठ हों एक सौ आठ ॥
॥ चौपाई ॥
गौरी गणपति प्रथम मनाऊं
सकल कामना सिद्ध कराऊं ॥
जगजननी कामाख्या माता
शिवशक्ति मेरी भाग्यविधाता ॥
लगन लगी कुछ भी ना जानूं
कैसे तेरा गुणगान बखानूं ॥
दस विद्या का अंश मात्र भी
जानूं नहीं ग्रह गौचरात्र भी ॥
शुभ और अशुभ घड़ी तू जाने
बैठ गया हूं तुझको रिझाने ॥
बालक बुद्धि जान निहारो
सिर पे रख दो हाथ तुम्हारो ॥
परमेश्वरी सम्पूर्ण आराध्या
निकसी अंतस अर्चन आध्या ॥
ब्रह्मा विष्णु शिव हे माते
काम क्षेत्र तेरा ध्यान लगाते ॥
मुनिवर श्रेष्ठ वशिष्ठ सिद्ध हैं
भांतिब्रह्म जन जन प्रसिद्ध है
हार के आया त्रिपुर भैरवी
कौन करे मां मेरी पैरवी ॥
निपट अकेला निपट अनाड़ी
चल जाए मेरी भी गाड़ी ॥
एक बार मोहि आन निहारो
कामाख्या मेरी मात उबारो ॥
मनो कामना पूरी कर दो
शरण पड़ा हूं माता वर दो ॥
पूरब दिशि मां तारा दर्शन
अगनकण षोडशी सुदर्शन ॥
धूमावती दक्षिण में दयाला
नैऋत्यां भज भैरवी माला
भुवनेश्वरी पश्चिम करे रक्षा
छिन्नमस्ता वायब्य सुरक्षा
बगलामुखी उत्तर दिशि शोभा
त्रिपुरसुंदरी दे मति बोधा ॥
ऊर्ध्व उज्वला मातंगिनी मां
सर्व रक्षिका क्लीं काली मां ॥
दसों दिशा में तेरी ज्योति
रोम रोम आराधना होती
जय जयकारे नभ गूंजे मां
अन धन खुशियां सब लूटे मां ॥
आशा पूरण आज करो मां
संकट काटो कष्ट हरो मां ॥
स्वीकारो मेरी मानस पूजा
नैम धरम जानूं नहीं दूजा ॥
पावन दिन वैशाख तृतीया
जाप करै सम्मुख रख दीया ॥
परम् पिता शिवशंकर कहते
निश्छल मन हो आंसू बहते ॥
ऐसी करो पुकार सुने मां
जो भी वांछित वर दे दे मां ॥
यही धारणा लेकर बैठा पूजा
प्रार्थना करने बैठा डाकिन
शाकिन पास ना फटकै
प्रेतादिक सबभागे बचकै
निर्भय हो कर तुम्हें मनाऊं
नित्य नए गुणगान सुनाऊं ॥
सभी सिद्धियां देने वाली वाली
बिगड़े भाग्य बनाने वाली ॥
अखिलाराध्या भीम लोचना
दीनन दुःख दारिद्र मोचना ॥
रक्तबीज महिसासुर मर्दिनि
काम रूप मां नित्य वंदिनि ॥
नव ग्रहादि अरु दिग् दिग्पाला
क्षेत्रपाल हो सब रखवाला
बावन भैरव चौसठ योगिन
चले नहीं मां तब आज्ञा बिन ॥
अप्सरायक्ष यक्षिणी शीश नवावै
तेरे लाल को नहीं सतावै ॥
ब्रह्मदैत्य वेताल
कान भरै ना कोई मंथरा ॥
सत कोटि ब्रह्मांड हैं तेरे
रूप तेरे उनमें बहुतेरे
ममता का आंचल फैलाओ
लाल को अपने गले लगाओ ॥
दुर्बल अति कमजोर हूं मैया
बन जाऊं तेरो कुंवरकन्हैया ॥
कठिन कौनसो काम तुझे मां
जो ना तुम कर सको उसे मां ॥
" लहरी" लज्जा हाथ तेरे मां
निश्चित जागे भाग्य मेरे मां ॥
॥ दोहा ॥
गुरु गोविंद का आसरा, तात मात सिर नाय
कामाख्या मां शारदा, सिद्ध सकल हो जाय
विद्व सिद्ध संतन गुणी, तपसी तारणहार
हाथ जोड़ “लहरी" करे, वंदन बारम्बार ॥
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