श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रम् (Sri Gayatri Sahasranama Stotram Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

Roshan Lal Bind

श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रम् (Sri Gayatri Sahasranama Stotram Lyrics in Hindi) - 


॥ श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रम् 


॥ ध्यानम् 

मुक्ताविद्रुमहेमनीलधवलच्छायैर्मुखैस्त्रीक्षणैः

युक्तामिन्दुनिबद्धरत्नमकुटां तत्त्वार्थवर्णात्मिकाम् 

गायत्रीं वरदाऽभयाङ्कुशकशाः शुभ्रं कपालं गदां

शङ्खं चक्रमथारविन्दयुगलं हस्तैर्वहन्तीं भजे ॥


॥ अथ स्तोत्रं ॥

तत्काररूपा तत्त्वज्ञा तत्पदार्थस्वरूपिणी 

तपस्स्व्याध्यायनिरता तपस्विजनसन्नुता ॥ १ ॥


तत्कीर्तिगुणसम्पन्ना तथ्यवाक्च तपोनिधिः 

तत्त्वोपदेशसम्बन्धा तपोलोकनिवासिनी ॥ २ ॥


तरुणादित्यसङ्काशा तप्तकाञ्चनभूषणा 

तमोऽपहारिणी तन्त्री तारिणी ताररूपिणी ॥ ३ ॥


तलादिभुवनान्तःस्था तर्कशास्त्रविधायिनी 

तन्त्रसारा तन्त्रमाता तन्त्रमार्गप्रदर्शिनी ॥ ४ ॥


तत्त्वा तन्त्रविधानज्ञा तन्त्रस्था तन्त्रसाक्षिणी 

तदेकध्याननिरता तत्त्वज्ञानप्रबोधिनी ॥ ५ ॥


तन्नाममन्त्रसुप्रीता तपस्विजनसेविता 

सकाररूपा सावित्री सर्वरूपा सनातनी ॥ ६ ॥


संसारदुःखशमनी सर्वयागफलप्रदा 

सकला सत्यसङ्कल्पा सत्यासत्यप्रदायिनी ॥ ७ ॥


सन्तोषजननी सारा सत्यलोकनिवासिनी 

समुद्रतनयाराध्या सामगानप्रिया सती ॥ ८ ॥


समाना सामदेवी च समस्तसुरसेविता 

सर्वसम्पत्तिजननी सद्गुणा सकलेष्टदा ॥ ९ ॥


सनकादिमुनिध्येया समानाधिकवर्जिता 

साध्या सिद्धा सुधावासा सिद्धिः साध्यप्रदायिनी ॥ १० ॥


सद्युगाराध्यनिलया समुत्तीर्णा सदाशिवा 

सर्ववेदान्तनिलया सर्वशास्त्रार्थगोचरा ॥ ११ ॥


सहस्रदलपद्मस्था सर्वज्ञा सर्वतोमुखी 

समया समयाचारा सदसद्ग्रन्थिभेदिनी ॥ १२ ॥


सप्तकोटिमहामन्त्रमाता सर्वप्रदायिनी 

सगुणा सम्भ्रमा साक्षी सर्वचैतन्यरूपिणी ॥ १३ ॥


सत्कीर्तिः सात्त्विकी साध्वी सच्चिदानन्दरूपिणी 

सङ्कल्परूपिणी सन्ध्या सालग्रामनिवासिनी ॥ १४ ॥


सर्वोपाधिविनिर्मुक्ता सत्यज्ञानप्रबोधिनी 

विकाररूपा विप्रश्रीर्विप्राराधनतत्परा ॥ १५ ॥


विप्रप्रीर्विप्रकल्याणी विप्रवाक्यस्वरूपिणी 

विप्रमन्दिरमध्यस्था विप्रवादविनोदिनी ॥ १६ ॥


विप्रोपाधिविनिर्भेत्री विप्रहत्याविमोचनी 

विप्रत्रात्री विप्रगोत्रा विप्रगोत्रविवर्धिनी ॥ १७ ॥


विप्रभोजनसन्तुष्टा विष्णुरूपा विनोदिनी 

विष्णुमाया विष्णुवन्द्या विष्णुगर्भा विचित्रिणी ॥ १८ ॥


वैष्णवी विष्णुभगिनी विष्णुमायाविलासिनी 

विकाररहिता विश्वविज्ञानघनरूपिणी ॥ १९ ॥


विबुधा विष्णुसङ्कल्पा विश्वामित्रप्रसादिनी 

विष्णुचैतन्यनिलया विष्णुस्वा विश्वसाक्षिणी ॥ २० ॥


विवेकिनी वियद्रूपा विजया विश्वमोहिनी 

विद्याधरी विधानज्ञा वेदतत्त्वार्थरूपिणी ॥ २१ ॥


विरूपाक्षी विराड्रूपा विक्रमा विश्वमङ्गला 

विश्वम्भरासमाराध्या विश्वभ्रमणकारिणी ॥ २२ ॥


विनायकी विनोदस्था वीरगोष्ठीविवर्धिनी 

विवाहरहिता विन्ध्या विन्ध्याचलनिवासिनी ॥ २३ ॥


विद्याविद्याकरी विद्या विद्याविद्याप्रबोधिनी 

विमला विभवा वेद्या विश्वस्था विविधोज्ज्वला ॥ २४ ॥


वीरमध्या वरारोहा वितन्त्रा विश्वनायिका 

वीरहत्याप्रशमनी विनम्रजनपालिनी ॥ २५ ॥


वीरधीर्विविधाकारा विरोधिजननाशिनी 

तुकाररूपा तुर्यश्रीस्तुलसीवनवासिनी ॥ २६ ॥


तुरङ्गी तुरगारूढा तुलादानफलप्रदा 

तुलामाघस्नानतुष्टा तुष्टिपुष्टिप्रदायिनी ॥ २७ ॥


तुरङ्गमप्रसन्तुष्टा तुलिता तुल्यमध्यगा 

तुङ्गोत्तुङ्गा तुङ्गकुचा तुहिनाचलसंस्थिता ॥ २८ ॥


तुम्बुरादिस्तुतिप्रीता तुषारशिखरीश्वरी 

तुष्टा च तुष्टिजननी तुष्टलोकनिवासिनी ॥ २९ ॥


तुलाधारा तुलामध्या तुलास्था तुर्यरूपिणी 

तुरीयगुणगम्भीरा तुर्यनादस्वरूपिणी ॥ ३० ॥


तुर्यविद्यालास्यतुष्टा तुर्यशास्त्रार्थवादिनी 

तुरीयशास्त्रतत्त्वज्ञा तुर्यवादविनोदिनी ॥ ३१ ॥


तुर्यनादान्तनिलया तुर्यानन्दस्वरूपिणी 

तुरीयभक्तिजननी तुर्यमार्गप्रदर्शिनी ॥ ३२ ॥


र्वकाररूपा वागीशी वरेण्या वरसंविधा 

वरा वरिष्ठा वैदेही वेदशास्त्रप्रदर्शिनी ॥ ३३ ॥


विकल्पशमनी वाणी वाञ्छितार्थफलप्रदा 

वयःस्था च वयोमध्या वयोऽवस्थाविवर्जिता ॥ ३४ ॥


वन्दिनी वादिनी वर्या वाङ्मयी वीरवन्दिता 

वानप्रस्थाश्रमस्था च वनदुर्गा वनालया ॥ ३५ ॥


वनजाक्षी वनचरी वनिता विश्वमोहिनी 

वसिष्ठवामदेवादिवन्द्या वन्द्यस्वरूपिणी ॥ ३६ ॥


वैद्या वैद्यचिकित्सा च वषट्कारी वसुन्धरा 

वसुमाता वसुत्राता वसुजन्मविमोचनी ॥ ३७ ॥


वसुप्रदा वासुदेवी वासुदेवमनोहरी 

वासवार्चितपादश्रीर्वासवारिविनाशिनी ॥ ३८ ॥


 वागीशी वाङ्मनःस्थायी वशिनी वनवासभूः 

वामदेवी वरारोहा वाद्यघोषणतत्परा ॥ ३९ ॥


वाचस्पतिसमाराध्या वेदमाता विनोदिनी 

रेकाररूपा रेवा च रेवातीरनिवासिनी ॥ ४० ॥


राजीवलोचना रामा रागिणी रतिवन्दिता 

रमणी रामजप्ता च राज्यपा रजताद्रिगा ॥ ४१ ॥


राकिणी रेवती रक्षा रुद्रजन्मा रजस्वला 

रेणुका रमणी रम्या रतिवृद्धा रता रतिः ॥ ४२ ॥


रावणानन्दसन्धायी राजश्री राजशेखरी 

रणमध्या रथारूढा रविकोटिसमप्रभा ॥ ४३ ॥


रविमण्डलमध्यस्था रजनी रविलोचना 

रथाङ्गपाणी रक्षोघ्नी रागिणी रावणार्चिता ॥ ४४ ॥


रम्भादिकन्यकाराध्या राज्यदा राज्यवर्धिनी 

रजताद्रीशसक्थिस्था रम्या राजीवलोचना ॥ ४५ ॥


रम्यवाणी रमाराध्या राज्यधात्री रतोत्सवा 

रेवती च रतोत्साहा राजहृद्रोगहारिणी ॥ ४६ ॥


रङ्गप्रवृद्धमधुरा रङ्गमण्डपमध्यगा 

रञ्जिता राजजननी रम्या राकेन्दुमध्यगा ॥ ४७ ॥


राविणी रागिणी रञ्ज्या राजराजेश्वरार्चिता 

राजन्वती राजनीती रजताचलवासिनी ॥ ४८ ॥


राघवार्चितपादश्रीः राघवी राघवप्रिया 

रत्ननूपुरमध्याढ्या रत्नद्वीपनिवासिनी ॥ ४९ ॥


रत्नप्राकारमध्यस्था रत्नमण्डपमध्यगा 

रत्नाभिषेकसन्तुष्टा रत्नाङ्गी रत्नदायिनी ॥ ५० ॥


णिकाररूपिणी नित्या नित्यतृप्ता निरञ्जना 

निद्रात्ययविशेषज्ञा नीलजीमूतसन्निभा ॥ ५१ ॥


नीवारशूकवत्तन्वी नित्यकल्याणरूपिणी 

नित्योत्सवा नित्यपूज्या नित्यानन्दस्वरूपिणी ॥ ५२ ॥


निर्विकल्पा निर्गुणस्था निश्चिन्ता निरुपद्रवा 

निस्संशया निरीहा च निर्लोभा नीलमूर्धजा ॥ ५३ ॥


निखिलागममध्यस्था निखिलागमसंस्थिता 

नित्योपाधिविनिर्मुक्ता नित्यकर्मफलप्रदा ॥ ५४ ॥


नीलग्रीवा निराहारा निरञ्जनवरप्रदा 

नवनीतप्रिया नारी नरकार्णवतारिणी ॥ ५५ ॥


नारायणी निरीहा च निर्मला निर्गुणप्रिया 

निश्चिन्ता निगमाचारनिखिलागमवेदिनी ॥ ५६ ॥


निमेषानिमिषोत्पन्ना निमेषाण्डविधायिनी 

निवातदीपमध्यस्था निर्विघ्ना नीचनाशिनी ॥ ५७ ॥


नीलवेणी नीलखण्डा निर्विषा निष्कशोभिता 

नीलांशुकपरीधाना निन्दाघ्नी च निरीश्वरी ॥ ५८ ॥


निश्वासोच्छ्वासमध्यस्था नित्ययानविलासिनी 

यङ्काररूपा यन्त्रेशी यन्त्री यन्त्रयशस्विनी ॥ ५९ ॥


यन्त्राराधनसन्तुष्टा यजमानस्वरूपिणी 

योगिपूज्या यकारस्था यूपस्तम्भनिवासिनी ॥ ६० ॥


यमघ्नी यमकल्पा च यशःकामा यतीश्वरी 

यमादियोगनिरता यतिदुःखापहारिणी ॥ ६१ ॥


यज्ञा यज्वा यजुर्गेया यज्ञेश्वरपतिव्रता 

यज्ञसूत्रप्रदा यष्ट्री यज्ञकर्मफलप्रदा ॥ ६२ ॥


यवाङ्कुरप्रिया यन्त्री यवदघ्नी यवार्चिता 

यज्ञकर्ती यज्ञभोक्त्री यज्ञाङ्गी यज्ञवाहिनी ॥ ६३ ॥


यज्ञसाक्षी यज्ञमुखी यजुषी यज्ञरक्षणी 

भकाररूपा भद्रेशी भद्रकल्याणदायिनी ॥ ६४ ॥


भक्तप्रिया भक्तसखी भक्ताभीष्टस्वरूपिणी 

भगिनी भक्तसुलभा भक्तिदा भक्तवत्सला ॥ ६५ ॥


भक्तचैतन्यनिलया भक्तबन्धविमोचनी 

भक्तस्वरूपिणी भाग्या भक्तारोग्यप्रदायिनी ॥ ६६ ॥


भक्तमाता भक्तगम्या भक्ताभीष्टप्रदायिनी 

भास्करी भैरवी भोग्या भवानी भयनाशिनी ॥ ६७ ॥


भद्रात्मिका भद्रदायी भद्रकाली भयङ्करी 

भगनिष्यन्दिनी भूम्नी भवबन्धविमोचनी ॥ ६८ ॥


भीमा भवसखी भङ्गी भङ्गुरा भीमदर्शिनी 

भल्ली भल्लीधरा भीरुर्भेरुण्डा भीमपापहा ॥ ६९ ॥


भावज्ञा भोगदात्री च भवघ्नी भूतिभूषणा 

भूतिदा भूमिदात्री च भूपतित्वप्रदायिनी ॥ ७० ॥


भ्रामरी भ्रमरी भारी भवसागरतारिणी 

भण्डासुरवधोत्साहा भाग्यदा भावमोदिनी ॥ ७१ ॥


गोकाररूपा गोमाता गुरुपत्नी गुरुप्रिया 

गोरोचनप्रिया गौरी गोविन्दगुणवर्धिनी ॥ ७२ ॥


गोपालचेष्टासन्तुष्टा गोवर्धनविवर्धिनी 

गोविन्दरूपिणी गोप्त्री गोकुलानां विवर्धिनी ॥ ७३ ॥


गीता गीतप्रिया गेया गोदा गोरूपधारिणी 
गोपी गोहत्यशमनी गुणिनी गुणिविग्रहा ॥ ७४ ॥

गोविन्दजननी गोष्ठा गोप्रदा गोकुलोत्सवा 
गोचरी गौतमी गोप्त्री गोमुखी गुणवासिनी ॥ ७५ ॥

गोपाली गोमया गुम्फा गोष्ठी गोपुरवासिनी 
गरुडी गमनश्रेष्ठा गारुडी गरुडध्वजा ॥ ७६ ॥

गम्भीरा गण्डकी गुम्भा गरुडध्वजवल्लभा 
गगनस्था गयावासा गुणवृत्तिर्गुणोद्भवा ॥ ७७ ॥

देकाररूपा देवेशी दृग्रूपा देवतार्चिता 
देवराजेश्वरार्धाङ्गी दीनदैन्यविमोचनी ॥ ७८ ॥

देशकालपरिज्ञाना देशोपद्रवनाशिनी 
देवमाता देवमोहा देवदानवमोहिनी ॥ ७९ ॥

देवेन्द्रार्चितपादश्रीर्देवदेवप्रसादिनी 
देशान्तरी देशरूपा देवालयनिवासिनी ॥ ८० ॥

देशभ्रमणसन्तुष्टा देशस्वास्थ्यप्रदायिनी 
देवयाना देवता च देवसैन्यप्रपालिनी ॥ ८१ ॥

वकाररूपा वाग्देवी वेदमानसगोचरा 
वैकुण्ठदेशिका वेद्या वायुरूपा वरप्रदा ॥ ८२ ॥

वक्रतुण्डार्चितपदा वक्रतुण्डप्रसादिनी 
वैचित्र्यरूपा वसुधा वसुस्थाना वसुप्रिया ॥ ८३ ॥

वषट्कारस्वरूपा च वरारोहा वरासना 
वैदेहीजननी वेद्या वैदेहीशोकनाशिनी ॥ ८४ ॥

वेदमाता वेदकन्या वेदरूपा विनोदिनी 
वेदान्तवादिनी चैव वेदान्तनिलयप्रिया ॥ ८५ ॥

वेदश्रवा वेदघोषा वेदगीता विनोदिनी 
वेदशास्त्रार्थतत्त्वज्ञा वेदमार्गप्रदर्शिनी ॥ ८६ ॥

वेदोक्तकर्मफलदा वेदसागरवाडवा 
वेदवन्द्या वेदगुह्या वेदाश्वरथवाहिनी ॥ ८७ ॥

वेदचक्रा वेदवन्द्या वेदाङ्गी वेदवित्कविः 
स्यकाररूपा सामन्ता सामगानविचक्षणा ॥ ८८ ॥

साम्राज्ञी सामरूपा च सदानन्दप्रदायिनी 
सर्वदृक्सन्निविष्टा च सर्वसम्प्रेषिणी सहा ॥ ८९ ॥

सव्यापसव्यदा सव्यसध्रीची च सहायिनी 
सकला सागरा सारा सार्वभौमस्वरूपिणी ॥ ९० ॥

सन्तोषजननी सेव्या सर्वेशी सर्वरञ्जनी 
सरस्वती समाराध्या सामदा सिन्धुसेविता ॥ ९१ ॥

सम्मोहिनी सदामोहा सर्वमाङ्गल्यदायिनी 
समस्तभुवनेशानी सर्वकामफलप्रदा ॥ ९२ ॥

सर्वसिद्धिप्रदा साध्वी सर्वज्ञानप्रदायिनी 
सर्वदारिद्र्यशमनी सर्वदुःखविमोचनी ॥ ९३ ॥

सर्वरोगप्रशमनी सर्वपापविमोचनी 
समदृष्टिः समगुणा सर्वगोप्त्री सहायिनी ॥ ९४ ॥

सामर्थ्यवाहिनी साङ्ख्या सान्द्रानन्दपयोधरा 
सङ्कीर्णमन्दिरस्थाना साकेतकुलपालिनी ॥ ९५ ॥

संहारिणी सुधारूपा साकेतपुरवासिनी 
सम्बोधिनी समस्तेशी सत्यज्ञानस्वरूपिणी ॥ ९६ ॥

सम्पत्करी समानाङ्गी सर्वभावसुसंस्थिता 
सन्ध्यावन्दनसुप्रीता सन्मार्गकुलपालिनी ॥ ९७ ॥

सञ्जीविनी सर्वमेधा सभ्या साधुसुपूजिता 
समिद्धा सामिधेनी च सामान्या सामवेदिनी ॥ ९८ ॥

समुत्तीर्णा सदाचारा संहारा सर्वपावनी 
सर्पिणी सर्पमाता च समादानसुखप्रदा ॥ ९९ ॥

सर्वरोगप्रशमनी सर्वज्ञत्वफलप्रदा 
सङ्क्रमा समदा सिन्धुः सर्गादिकरणक्षमा ॥ १०० ॥

सङ्कटा सङ्कटहरा सकुङ्कुमविलेपना 
सुमुखी सुमुखप्रीता समानाधिकवर्जिता ॥ १०१ ॥

संस्तुता स्तुतिसुप्रीता सत्यवादी सदास्पदा 
धीकाररूपा धीमाता धीरा धीरप्रसादिनी ॥ १०२ ॥

धीरोत्तमा धीरधीरा धीरस्था धीरशेखरा 
धृतिरूपा धनाढ्या च धनपा धनदायिनी ॥ १०३ ॥

धीरूपा धीरवन्द्या च धीप्रभा धीरमानसा 
धीगेया धीपदस्था च धीशानी धीप्रसादिनी ॥ १०४ ॥

मकाररूपा मैत्रेयी महामङ्गलदेवता 
मनोवैकल्यशमनी मलयाचलवासिनी ॥ १०५ ॥

मलयध्वजराजश्रीर्मायामोहविभेदिनी 
महादेवी महारूपा महाभैरवपूजिता ॥ १०६ ॥

मनुप्रीता मन्त्रमूर्तिर्मन्त्रवश्या महेश्वरी 
मत्तमातङ्गगमना मधुरा मेरुमण्डपा ॥ १०७ ॥

महागुप्ता महाभूतमहाभयविनाशिनी 
महाशौर्या मन्त्रिणी च महावैरिविनाशिनी ॥ १०८ ॥

महालक्ष्मीर्महागौरी महिषासुरमर्दिनी 
मही च मण्डलस्था च मधुरागमपूजिता ॥ १०९ ॥

मेधा मेधाकरी मेध्या माधवी मधुमर्दिनी 
मन्त्रा मन्त्रमयी मान्या माया माधवमन्त्रिणी ॥ ११० ॥

मायादूरा च मायावी मायाज्ञा मानदायिनी 
मायासङ्कल्पजननी मायामायविनोदिनी ॥ १११ ॥

मायाप्रपञ्चशमनी मायासंहाररूपिणी 
मायामन्त्रप्रसादा च मायाजनविमोहिनी ॥ ११२ ॥

महापथा महाभोगा महविघ्नविनाशिनी 
महानुभावा मन्त्राढ्या महमङ्गलदेवता ॥ ११३ ॥

हिकाररूपा हृद्या च हितकार्यप्रवर्धिनी 
हेयोपाधिविनिर्मुक्ता हीनलोकविनाशिनी ॥ ११४ ॥

ह्रीङ्कारी ह्रीम्मती हृद्या ह्रीं‍देवी ह्रीं‍स्वभाविनी 
ह्रीं‍मन्दिरा हितकरी हृष्टा च ह्रीं‍कुलोद्भवा ॥ ११५ ॥

हितप्रज्ञा हितप्रीता हितकारुण्यवर्धिनी 
हिताशिनी हितक्रोधा हितकर्मफलप्रदा ॥ ११६ ॥

हिमा हैमवती हैम्नी हेमाचलनिवासिनी 
हिमागजा हितकरी हितकर्मस्वभाविनी ॥ ११७ ॥

धिकाररूपा धिषणा धर्मरूपा धनेश्वरी 
धनुर्धरा धराधारा धर्मकर्मफलप्रदा ॥ ११८ ॥

धर्माचारा धर्मसारा धर्ममध्यनिवासिनी 
धनुर्विद्या धनुर्वेदा धन्या धूर्तविनाशिनी ॥ ११९ ॥

धनधान्या धेनुरूपा धनाढ्या धनदायिनी 
धनेशी धर्मनिरता धर्मराजप्रसादिनी ॥ १२० ॥

धर्मस्वरूपा धर्मेशी धर्माधर्मविचारिणी 
धर्मसूक्ष्मा धर्मगेहा धर्मिष्ठा धर्मगोचरा ॥ १२१ ॥

योकाररूपा योगेशी योगस्था योगरूपिणी 
योग्या योगीशवरदा योगमार्गनिवासिनी ॥ १२२ ॥

योगासनस्था योगेशी योगमायाविलासिनी 
योगिनी योगरक्ता च योगाङ्गी योगविग्रहा ॥ १२३ ॥

योगवासा योगभाग्या योगमार्गप्रदर्शिनी 
योकाररूपा योधाढ्या योद्ध्री योधसुतत्परा ॥ १२४ ॥

योगिनी योगिनीसेव्या योगज्ञानप्रबोधिनी 
योगेश्वरप्राणानाथा योगीश्वरहृदिस्थिता ॥ १२५ ॥

योगा योगक्षेमकर्त्री योगक्षेमविधायिनी 
योगराजेश्वराराध्या योगानन्दस्वरूपिणी ॥ १२६ ॥

नकाररूपा नादेशी नामपारायणप्रिया 
नवसिद्धिसमाराध्या नारायणमनोहरी ॥ १२७ ॥

नारायणी नवाधारा नवब्रह्मार्चिताङ्घ्रिका 
नगेन्द्रतनयाराध्या नामरूपविवर्जिता ॥ १२८ ॥

नरसिंहार्चितपदा नवबन्धविमोचनी 
नवग्रहार्चितपदा नवमीपूजनप्रिया ॥ १२९ ॥

नैमित्तिकार्थफलदा नन्दितारिविनाशिनी 
नवपीठस्थिता नादा नवर्षिगणसेविता ॥ १३० ॥

नवसूत्रविधानज्ञा नैमिषारण्यवासिनी 
नवचन्दनदिग्धाङ्गी नवकुङ्कुमधारिणी ॥ १३१ ॥

नववस्त्रपरीधाना नवरत्नविभूषणा 
नव्यभस्मविदग्धाङ्गी नवचन्द्रकलाधरा ॥ १३२ ॥

प्रकाररूपा प्राणेशी प्राणसंरक्षणी परा 
प्राणसञ्जीविनी प्राच्या प्राणिप्राणप्रबोधिनी ॥ १३३ ॥

प्रज्ञा प्राज्ञा प्रभापुष्पा प्रतीची प्रबुधप्रिया 
प्राचीना प्राणिचित्तस्था प्रभा प्रज्ञानरूपिणी ॥ १३४ ॥

प्रभातकर्मसन्तुष्टा प्राणायामपरायणा 
प्रायज्ञा प्रणवा प्राणा प्रवृत्तिः प्रकृतिः परा ॥ १३५ ॥

प्रबन्धा प्रथमा चैव प्रज्ञा प्रारब्धनाशिनी 
प्रबोधनिरता प्रेक्ष्या प्रबन्धा प्राणसाक्षिणी ॥ १३६ ॥

प्रयागतीर्थनिलया प्रत्यक्षपरमेश्वरी 
प्रणवाद्यन्तनिलया प्रणवादिः प्रजेश्वरी ॥ १३७ ॥

चोकाररूपा चोरघ्नी चोरबाधाविनाशिनी 
चैतन्यचेतनस्था च चतुरा च चमत्कृतिः ॥ १३८ ॥

चक्रवर्तिकुलाधारा चक्रिणी चक्रधारिणी 
चित्तगेया चिदानन्दा चिद्रूपा चिद्विलासिनी ॥ १३९ ॥

चिन्ताचित्तप्रशमनी चिन्तितार्थफलप्रदा 
चाम्पेयी चम्पकप्रीता चण्डी चण्डाट्‍टहासिनी ॥ १४० ॥

चण्डेश्वरी चण्डमाता चण्डमुण्डविनाशिनी 
चकोराक्षी चिरप्रीता चिकुरा चिकुरालका ॥ १४१ ॥

चैतन्यरूपिणी चैत्री चेतना चित्तसाक्षिणी 
चित्रा चित्रविचित्राङ्गी चित्रगुप्तप्रसादिनी ॥ १४२ ॥

चलना चक्रसंस्था च चाम्पेयी चलचित्रिणी 
चन्द्रमण्डलमध्यस्था चन्द्रकोटिसुशीतला ॥ १४३ ॥

चन्द्रानुजसमाराध्या चन्द्रा चण्डमहोदरी 
चर्चितारिश्चन्द्रमाता चन्द्रकान्ता चलेश्वरी ॥ १४४ ॥

चराचरनिवासी च चक्रपाणिसहोदरी 
दकाररूपा दत्तश्रीर्दारिद्र्यच्छेदकारिणी ॥ १४५ ॥

दत्तात्रेयस्य वरदा दयालुर्दीनवत्सला 
दक्षाराध्या दक्षकन्या दक्षयज्ञविनाशिनी ॥ १४६ ॥

दक्षा दाक्षायणी दीक्षा दृष्टा दक्षवरप्रदा 
दक्षिणा दक्षिणाराध्या दक्षिणामूर्तिरूपिणी ॥ १४७ ॥

दयावती दमस्वान्ता दनुजारिर्दयानिधिः 
दन्तशोभनिभा देवी दमना दाडिमस्तनी ॥ १४८ ॥

दण्डा च दमयित्री च दण्डिनी दमनप्रिया 
दण्डकारण्यनिलया दण्डकारिविनाशिनी ॥ १४९ ॥

दंष्ट्राकरालवदना दण्डशोभा दरोदरी 
दरिद्रारिष्टशमनी दम्या दमनपूजिता ॥ १५० ॥

दानवार्चितपादश्रीर्द्रविणा द्राविणी दया 
दामोदरी दानवारिर्दामोदरसहोदरी ॥ १५१ ॥

दात्री दानप्रिया दाम्नी दानश्रीर्द्विजवन्दिता 
दन्तिगा दण्डिनी दूर्वा दधिदुग्धस्वरूपिणी ॥ १५२ ॥

दाडिमीबीजसन्दोहदन्तपङ्क्तिविराजिता 
दर्पणा दर्पणस्वच्छा द्रुममण्डलवासिनी ॥ १५३ ॥

दशावतारजननी दशदिग्दैवपूजिता 
दमा दशदिशा दृश्या दशदासी दयानिधिः ॥ १५४ ॥

देशकालपरिज्ञाना देशकालविशोधिनी 
दशम्यादिकलाराध्य दशग्रीवविरोधिनी ॥ १५५ ॥

दशापराधशमनी दशवृत्तिफलप्रदा 
यात्काररूपिणी याज्ञी यादवी यादवार्चिता ॥ १५६ ॥

ययातिपूजनप्रीता याज्ञिकी याजकप्रिया 
यजमाना यदुप्रीता यामपूजाफलप्रदा ॥ १५७ ॥

यशस्विनी यमाराध्या यमकन्या यतीश्वरी 
यमादियोगसन्तुष्टा योगीन्द्रहृदया यमा ॥ १५८ ॥

यमोपाधिविनिर्मुक्ता यशस्यविधिसन्नुता 
यवीयसी युवप्रीता यात्रानन्दा यतीश्वरी ॥ १५९ ॥

योगप्रिया योगगम्या योगध्येया यथेच्छगा 
यागप्रिया याज्ञसेनी योगरूपा यथेष्टदा ॥ १६० ॥

॥ इति श्री गायत्री दिव्यसहस्रनाम स्तोत्रम् ॥



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